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Gold ...

महाभारत
ग्रन्थ में एक प्रकरण है कि राजा परिक्षित ने कलयुग को वश कर लिया था। कलयुग ने कहा था मुझे दो स्थानों पर रहने की आज्ञा दे दो। एक तो स्वर्ण (Gold) पर, दूसरे शराब पर। राजा परीक्षित ने उसको यह शर्तें मानकर छोड़ दिया। एक दिन राजा सिर पर स्वर्ण लगा मुकुट धारण करके शिकार करने जंगल में गया। कलयुग ने मारवी का रूप बनाया और राजा परिक्षित के स्वर्ण के मुकुट पर बैठ गया। जिस कारण से राजा परीक्षित का मन कलयुग के प्रभाव से दूषित हो गया। राजा ने एक भीण्डी नाम के ऋषि से जंगल से बाहर जाने का मार्ग पूछा। ऋषि साधना में लीन था, सुना नहीं। जिस कारण से कोई उत्तर नहीं दिया। राजा ने एक मृत सर्प शरारतवश ऋषि के गले में डाल दिया। ऋषि का पुत्र बच्चों में खेल रहा था। बच्चों ने उसे बताया कि राजा परीक्षित ने आपके पिता के गले में सर्प डाल दिया है। ऋषि के बच्चे ने शाॅप दे दिया कि आज से सातवें दिन परीक्षित राजा को तक्षक सर्प डसेगा, उसकी मृत्यु हो जाएगी। ऐसा ही हुआ। इसलिए भक्तों को चाहिए कि वे सोने (Gold) का प्रयोग कभी न करें।

फिर कहा है कि मुसलमान धर्म में भी कहा है कि स्वर्ण में शैतान का निवास है। इबलिस नाम का शैतान बताया है। वह कहता है कि जो सूम यानि कंजूम जो धर्म नहीं करता, वह मेरा मित्र है। उसको नरक लेकर जाऊँगा।
परमेश्वर कबीर जी ने कहा है कि यदि जप, तप साधु भी करता है और दक्षिणा से पुण्य नहीं करता तो उसका वह प्रयत्न व्यर्थ है।
जो कछु पाप करे सो दाता। दान किये सो सकल निपाता।।
दान से पाप नष्ट हो जाता है। सभी धर्मों का यही मत है कि जो लोभ करता है, दान नहीं करता, वह नरक में गिरता है।

Book - कबीर सागर का सरलार्थ
लेखक - संत रामपाल जी महाराज जी

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www.jagatgururampalji.org/publications
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